WhatsApp Shayari for free download

There are many sorts of poetry which we get from history and which are extremely common today also. Poetry is also thought to be the the heart of the literature in a language. His classical poetry is still quite well known in South Asia and it’s also translated to many different languages. Therefore, if you’re also searching for sad poetry in Urdu for Broken Heart then you’re at right spot. Sad poetry which often conveys the emotions of love has become quite popular as time passes. It’s a poem that could include a minimum of 5 and a maximum of 25 verses. Romantic poems are only erotic to listen.

ये पत्थरों का शहर है सारा,किसी को किसी की पहचान नहीं
रहते हैं यहाँ शैतान ही अब,यहाँ बचा कोई भी इन्सान नहीं।

हमसे वो रिश्ता निभाया न गया,दर्द दिल का भी उनसे छुपाया न गया
हम जानते थे कि वो चाहते हैं हमें,चिराग मुहब्बत का हमसे जलाया न गया।

ग़र मुझको इजाजत तुम दे दो,एक मुलाकात ही कर लेंगे
मन को समझाना ही तो है,हम दिन को रात ही कर लेंगे।

गिला बस इसका है मुझको,मैं कुछ भी कह नहीं पाया
मेरी कमज़ोरी ही कह लो,तेरे बिन रह नहीं पाया।

वो मुझको भूल गया लेकिन,मुझसे ना भुलाया जाता है
खुशियों से मेल नहीं कोई,सागर का ग़म से नाता है।

नज़रें मेरी राहों पे लगी है,कि हज यार कभी तो मैं आएगा
किया है कितना इंतज़ार मैंने,ये रास्ता उसको बताएगा।

Hindi Shayari Collection – For Broken Heart whatsapp shayari lovers

जीना हमने सीख लिया है,अश्क छुपाना आने लगा है।
शिक्वा रहा न अब तो किसे से,खुद को हंसाना आने लगा है।

मेरी तरह सितारों से,कहा उसने भी कु छ होगा
अके ला मैं नहीं रोता,सहा उसने भी कु छ होगा।

Urdu poetry has developed and revolutionized from time to time. It is considered as an integral part of Pakistani culture. If You Really Love Urdu poetry then don’t forget to share with your pals.

shayari in urdu

Some individuals can be sad because of work stress while some might be unhappy because of heartbreak. The ideal way to express your grief is in your language. Emotions can be expressed totally from the base of the heart.

मिलेगा कुछ नहीं तुमको,न माँ गो हाथ फै लाकर
मुझे इतना तो बतलाना,क्या पाया है यहाँ आकर।

खता मुझसे हुई तो है,जो तुझपे प्यार आया है।
कि सी पत्थर की खातिर हो,ये दिल अपना रू लाया है ।

दिल में अरमान तो लाखों हैं,पूरे मगर ये होते नहीं
हँसते हैं साथ सब खुशियों में,ग़म में मगर संग रोते नहीं।

तुम्हारी महफिलों में हम बड़े बूढ़े जरूरी हैं,
अगर हम ही नहीं होंगे तो पगड़ी कौन बांधेगा !

सेहरा पे बुरा वक़्त मेरे यार पड़ा है,
दीवाना कई रोज़ से बीमार पड़ा है !

काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले
इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले

मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं,
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़ माँ रहने दिया !

अब अँधेरा मुस्तक़िल रहता है इस देहलीज़ पर,
जो हमारी मुन्तज़िर रहती थी आँखें बुझ गईं |